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Showing posts from August, 2020

भारत के इतिहास में सबसे दुखद घटना कौन सी घटित हुयी है.?

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भारत की वो एकलौती ऐसी घटना जब , अंग्रेज़ों ने एक साथ 52 क्रांतिकारियों को इमली के पेड़ पर लटका दिया था, पर वामपंथियों ने इतिहास की इतनी बड़ी घटना को आज तक गुमनामी के अंधेरों में ढके रखा। उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित बावनी इमली एक प्रसिद्ध इमली का पेड़ है, जो भारत में एक शहीद स्मारक भी है। इसी इमली के पेड़ पर 28 अप्रैल 1858 को गौतम क्षत्रिय, जोधा सिंह अटैया और उनके इक्यावन साथी फांसी पर झूले थे।  यह स्मारक उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिन्दकी उपखण्ड में खजुआ कस्बे के निकट बिन्दकी तहसील मुख्यालय से तीन किलोमीटर पश्चिम में मुगल रोड पर स्थित है। यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किये गये बलिदानों का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 को ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फाँसी दी गयी थी।  ये इमली का पेड़ अभी भी मौजूद है। लोगों का विश्वास है कि उस नरसंहार के बाद उस पेड़ का विकास बन्द हो गया है। 10 मई, 1857 को जब बैरकपुर छावनी में आजादी का शंखनाद किया गया, तो 10 जून,1857 को फतेहपुर में क्रान्तिवीरों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिया जिनका नेतृत्व ...

कुछ लोग कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी की आकस्मिक मृत्यु के बाद संबित पात्रा को बुरा भला क्यों कह रहे हैं?

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हाँ यह सत्य है कि राजीव त्यागी हमारे बीच नहीं रहे।  12 अगस्त, 2020 को दिल का दौरा पड़ने से उनका असामयिक निधन हो गया है। निधन के बाद कई आरोपों का दौर शुरू हुआ, तो क्या हुआ? राजीव त्यागी - राजीव त्यागी का जन्म 20 जून 1970 को हुआ था। 50 वर्षीय त्यागी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता थे। जो अक्सर टीवी डिबेट शो में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। राजीव त्यागी के निधन के बाद सम्बित पात्रा निशाने पर - राजीव त्यागी के निधन के बाद ट्विटर पर सम्बित पात्रा को ट्रोल किए जाने का सिलसिला शुरू हुआ। कई लोगों ने तो त्यागी के निधन का जिम्मेदार सम्बित को ठहराते हुये दावा किया कि एक निजी चैनल पर उनके निधन से कुछ पल पूर्व बीजेपी प्रवक्ता सम्बित पात्रा द्वारा त्यागी पर कठोर शब्दों में वार किया, जिसे वह सह नहीं सका और सदमे से उनका निधन हो गया। चित्रः डिबेट के दौरान एंकर सरदाना राजनीतिज्ञ त्यागी और पात्रा। त्यागी के निधन के बाद एक धड़े ने तो पत्रकारो को भी उनकी मौत का जिम्मेदार मानते हुए मीडिया को नफरत के डिबेट से अभिभूत बता दि...

बेंगलुरु में एक व्यक्ति द्वारा पैगम्बर साहब के ऊपर की गई अपमानजनक पोस्ट के विरोध में हुई हिंसा पर क्या कहना चाहिए ?

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बेंगलुरु में वर्ग विशेष द्वारा बड़े स्तर पर आगजनी जारी है हुआ यह कि कांग्रेस के ही दलित विधायक के एक भांजे ने मुस्लिमों के पैगंबर के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक पोस्ट कर दिया [1] लेकिन बाद में पता चला उसने पोस्ट नहीं किया था उसने बस रिप्लाई दिया था एक मुस्लिम ने भगवान श्री कृष्ण के बारे में एक बेहद निम्न स्तर का कमेंट किया था हिंदुओं द्वारा तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई लेकिन मुस्लिमों द्वारा कहा गया कि व्हाट्सएप पर बड़े स्तर पर भीड़ इकट्ठा कर ली गई और उसी का दंगा है खैर यह भी बड़ा मजेदार है रवीश कुमार जैसे लोग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी करके मजाक उड़ाते हैं और यहां व्हाट्सएप से युद्ध का मैदान बनाया जा रहा है जैसे कश्मीर में पहले पत्थरबाजों की भीड़ इकट्ठा होती थी अब वह देश के अन्य एरिया में दंगा करवाया जा रहा है चाहे दिल्ली दंगा हो जाए अब बेंगलुरु दंगा अब वह जो दलित किशोर है क्योंकि उसका जीवन संकट में आ चुका है कांग्रेस पार्टी जिसका वह विधायक था खुद वह लोग उसके पीछे पड़ चुके हैं तथाकथित दलित एक्टिविस्ट जो भीम मीम एकता बनाने में बिजी रहते हैं वह कुछ बोलेंगे नहीं क्योंकि वह खुद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया...

भारत और पाकिस्तान के बंटवारे में लाहौर और कराची को भारत में शामिल क्यों नहीं किया गया?

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लाहौर और कराची आजादी से पहले भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण शहर थे इनका उस दौर में चले जाने की कीमत आम भारतीयों को लम्बे समय तक चुकानी पड़ी लेकिन उसको पता भी नही की ये शहर उसके लिए कितने जरूरी थे , लाहौर उस दौर में एक विकसित शहर था तो दूसरी तरफ कराची उस दौर का मुम्बई था क्या आप को पता है ? ● 15 अगस्त 1947 को दो देश बन चुके थे लेकिन कौन सा शहर किस देश का हिस्सा बनेगा किसी को नही पता था । कारण क्या था ? मैप बनाने का काम रेडक्लिफ़ को दिया गया था उसको 40 दिन का समय और 40 हजार रुपये वेतन बोला गया था । ये इंसान ना तो भारत को जनता था ना ही भूगोल समझता था ना भारतीय संस्कृति क्या किया इसने उसने मैप बनाया और उसको छिपा कर रखा 17 अगस्त 1947 को पब्लिक किया गया और बिना अपना 40 हजार वेतन लिए भारत से भाग गया । यही सबसे बड़ा कारण था लाखों के कत्लेआम होने का क्योंकि जब अचानक से मैप सार्वजनिक किया गया तब तक दो देश बन गए थे और अपराधियों को खुला मौका मिल गया अपराध करने का क्योंकि पुलिस और कानून का राज अचानक से खत्म हो गया। पंजाब को समझते है । इसका बैकग्राउंड देखिए इसके लिए हमे महाराजा रणजीत सिंह के राज्य का मैप ...

कौन से फाइटर जेट राफेल की तुलना में घातक हैं?

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राफेल 4.5 पीढ़ी (जनरेशन) का है।  एफ-22  विमान 5वी पीढ़ी का है।। राफेल का रडार (अधिकांश लड़ाकू विमानों की तरह) किसी भी व्यावहारिक रेंज से  एफ-22  पर नज़र रखने में असमर्थ है। एफ-22  दुश्मन को बिना पता लगाए या उनके राडार में दिखे बिना उनके करीब जेक वार कर सकता है , राफेल (4.5) या दूसरे 4th जनरेशन के विमान से ये मुंकिन नहीं है। F-22 RAPTOR  (5th gen) राफेल की तुलना में घातक है अमेरिका का एफ-22 रैप्टर विश्व में सर्वश्रेष्ठ फाइटर विमान है (फ्रांस का राफेल दूसरे नंबर है) ... लॉकहीड मार्टिन-निर्मित एफ -22 को इतिहास का सबसे खतरनाक युद्धक विमान माना जाता है। प्रति विमान एक चौथाई बिलियन डॉलर का ये विमान तकनीकी चमत्कार जो रडार द्वारा पता न लगने से अपने विरोधियों की तुलना में अधिक और तेज उड़ान भरता है। राफेल: राफेल दक्षिण एशिया का सबसे शक्तिशाली विमान है, जो की पाकिस्तान द्रवरा उपयोग किये जाने वाले  F-16s  से बहुत आगे है, और चीन के 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान, जो कि जिसका मुकाबला अभी तक नहीं हुआ है।

अयोध्या में राम मंदिर के 'भूमि पूजन' के लिए पहला निमंत्रण इकबाल अंसारी को क्यों मिला?

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मुझे लगता है कि महंत नृत्य गोपाल दास, जो श्री राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, ने इकबाल अंसारी को पहला निमंत्रण पत्र देकर बहुत सराहनीय काम किया है। उन्होंने सनातन धर्म की सद्भावना और हिंदू-मुस्लिम एकता के शानदार उदाहरण को पूरे विश्व में पहुँचाया है। हमने खेलों में देखा है कि विजेता खिलाड़ी मैच खत्म होते ही विजेता खिलाड़ी से हाथ मिलाता है। यह विजेता की महानता है लेकिन जब पराजित खिलाड़ी इसे आसानी से स्वीकार करता है और विजेता खिलाड़ी को बधाई देता है, तो उसकी भावनाएं विजेता खिलाड़ी के बराबर हो जाती हैं। यही हमें यहाँ देखने को मिला जब महंत नृत्य गोपाल दास ने मंदिर विवाद के अपने प्रतिद्वंद्वी इकबाल अंसारी को भूमिपूजन का पहला निमंत्रण कार्ड दिया। इकबाल अंसारी के दिवंगत पिता हाशिम अंसारी , बाबरी मस्जिद - राम मंदिर विवाद के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण पार्टी के रूप में जाना जाता है। 1949 से 2016 तक, हाशिम अंसारी बिना थके मस्जिद का पक्ष लड़ते रहे। 2016 में हाशिम अंसारी की मृत्यु के बाद, उनके बेटे इकबाल अंसारी ने विरोधी पार्टी के रूप में बाबरी मस्जिद की कानूनी लड़ाई लड़ी। लेकिन यह भी सच...

भारतीय पीएम हमेशा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय एकतरफा संचार क्यों चुनते हैं? भारत के छद्म लोकतंत्र में किस प्रकार का शासन है

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मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस नही करते लेकिन उन्होंने प्रेस से जरूर वार्ता की 2019 के चुनावों के दौरान कई मीडिया चैनल,और व्यक्तिगत लोगों को इंटरव्यू किया। .. अब ये छद्मलोकतंत्र कैसे हुआ ?.. क्या लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी??? प्रेस को सूचना चाहिए तो उसके लिए सूचना विभाग है हर मंत्रालय की साइट्स हैं, मीडिया को प्रधानमंत्री या सरकार पर कुछ भी लांछन लगाने पर कोई रोक नही है,देश स्वतंत्र है कोई कुछ भी सच्चा झूठा आरोप लगा सकता है। . .. प्रधानमंत्री लगभग हर महीने "मन की बात" पर जनता से संवाद करते हैं और उससे पहले इसमें प्रश्न भी पूछने का प्राविधान है इसलिए इसे एकतरफा संवाद नही माना जा सकता है। ...ऐसा नही है कि मोदीजी ने कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस न कि हो, मुख्यमंत्री रहते उन्होंने जरूर प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद शायद उन्होंने नही की है और एक बार जरूर की थी बीजेपी के सदस्य के रूप में लेकिन उन्होंने अपना व्यक्तव्य देकर आगे की कार्यवाही/संचालन तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को सौंप दी। . . .. अब मैं असली मुद्दे पर आता हूँ, क्यो मोदीजी प्रेस कॉन्फ्रे...

क्या शिवलिंग रेडियोएक्टिव होते हैं?

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हाँ 100% सच है!! भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठा लें, हैरान हो जायेंगे! भारत सरकार के न्युक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। ▪️ शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्युक्लियर रिएक्टर्स ही तो हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहें। ▪️ महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे कि बिल्व पत्र, आकमद, धतूरा, गुड़हल आदि सभी न्युक्लिअर एनर्जी सोखने वाले हैं। ▪️ क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसीलिए तो जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता। ▪️ भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है। [1] ▪️ शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है। ▪️ तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि महादेव शिवशंकर अगर नाराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जाएगी। ▪️ ध्यान दें कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है। ▪️ जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो तो चिर सनातन है। विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन ...