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Showing posts from October, 2020

विष्णु भगवान ने पृथ्वी को किस समुद्र से निकाला था, जबकि समुद्र पृथ्वी पर ही है ।

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बचपन से मेरे मन मे भी ये सवाल था कि आखिर कैसे पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया जबकि समुद पृथ्वी पर ही है। मैंने इस प्रश्न को लेकर खोज भी किया और जो जानकारी मुझे मिली वो मैं आप सब को बताता हूँ। हिरणाकश्यप का भाई हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया था। फलस्वरूप भगवान बिष्णु ने सूकर का रूप धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को पुनः उसके कच्छ में स्थापित कर दिया। इस बात को आज के युग में एक दंतकथा के रूप में लिया जाता था। लोगों का ऐसा मानना था कि ये सरासर गलत और मनगढंत कहानी है। लेकिन नासा के एक खोज के अनुसार खगोल विज्ञान की दो टीमों ने ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए पानी के सबसे बड़े और सबसे दूर के जलाशय की खोज की है। उस जलाशय का पानी, हमारी पृथ्वी के समुद्र के 140 खरब गुना पानी के बराबर है। जो 12 बिलियन से अधिक प्रकाश-वर्ष दूर है। जाहिर सी बात है कि उस राक्षस ने पृथ्वी को इसी जलाशय में छुपाया होगा। इसे आप "भवसागर" भी कह सकते हैं। क्योंकि हिन्दू शास्त्र में भवसागर का वर्णन किया गया है। जब मैंने ये खबर पढ़ा तो मेरा भी भ्रम दूर हो गया। और अंत मे मैं सिर्फ इत...

क्या लोग देश की जीडीपी गिरने के बाद भी बीजेपी को 2024 में वोट डालेंगे ! क्यों?

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क्या चुनावों के पहले सोनिया गाँधी शाह बुखारी के पास देश की जीडीपी सुधारने जाती थी? क्या लालू यादव ने माई समीकरण बिहार को हांगकांग बनाने के लिए उछाला था? क्या द्रविड़ राजनीति या वामपंथी राजनीति देश के किसानों को बिल गेट्स बनाने के लिए की जाती है? ऊपर पूछे गए सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है, नहीं. २०१४ से पहले देश की राजनीति जीडीपी, किसान, विदेश नीति, रोजगार इत्यादि पर नहीं बल्कि मुस्लिम वोट बैंक या क्षेत्रीय वोटबैंक पर ही केंद्रित थी. किन्तु २०१४ में पहली बार कोई पार्टी आई जिसने विकास के नाम पर वोट माँगा. मोदी तो विकास के नाम पर ही वोट मांग रहा था किन्तु हिन्दू एकजुट हो चुके थे और उन्होंने पहली बार हिंदुत्व के नाम पर वोट देकर अपनी पार्टी को जिताया. बस तभी से इस देश की सेक्युलर, लिबरल और अर्बन नक्सल गैंग लगातार हिन्दुओं को समझा रही है की भाई, हिंदुत्व के लिए नहीं बल्कि जीडीपी के लिए वोट दो, रोजगार के लिए वोट दो, फिलिस्तीन और टर्की से अपने रिश्ते सुधारने के लिए वोट दो. लेकिन इस सेक्युलर, लिबरल और अर्बन नक्सल गैंग को यह समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर हिन्दू इनकी बात मान क्यों नहीं रहा और क्यों लग...

मोदी सरकार सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी क्यों बेच रही है ? क्या सारी सरकारी कंपनिया प्राइवेट हो जाएगी ?

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नीचे तीन केस स्टडीज हैं। त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लिमिटेड:- एक बहुत बड़ी हैवी इंजीनियरिंग कंपनी जो आस्ट्रिया के सहयोग से लगाई गई। छह हजार कर्मचारी कभी काम करते थे। विदेशों से मशीनें मंगाई गई। नेताओं ने अपने लोगों को नौकरियाँ दिलवा कर वोट बैंक सुरक्षित किया।शुरू के पाँच सालों में इतना घाटा हुआ आस्ट्रिया को कंपनी छोड़ के भागना पड़ा। नेताओं अफसरों ने आसपास छोटे बड़े वर्कशॉप लगा लिए और कंपनी का काम आउटसोर्सिंग करवा के मात्र पच्चीस साल में कम्पनी में लगे हजारों करोड़ बरबाद हो गए। कर्मचारियों को वीआरएस देने के अलावा कोई चारा नहीं।1969–2010 तक यह कंपनी सरकार के हजारों करोड़ बरबाद कर चुकी थी। सरकारी कर्मचारी हैं निकाल नहीं सकते। तनख्वाह देने के लिए पैसे नहीं हैं। मशीनें किराए पर दे देकर सिक्योरिटी का खर्च पूरा होता था। एक पीढ़ी को रोजगार मिला दूसरी पीढ़ी तक कंपनी डूब गई। एयर इंडिया:- इलाहाबाद से दिल्ली एक ही फ्लाइट थी एयर इंडिया की किराया ₹10000। इंडिगो की फ्लाइट शुरू हो गई तो किराया ₹3000 ऐसा क्यूँ होता है? पिछले 10 सालों में एयर इंडिया को सरकार एक लाख करोड़ की आर्थिक सहायता दे चुकी है। अभी भी तीस हजार क...